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कोरोना के दौरान करेंसी होल्डिंग बढ़ी, करेंसी सर्कुलेशन औसत 17% ज्यादा | कोरोना के दौरान करेंसी होल्डिंग बढ़ी, करेंसी सर्कुलेशन औसत 17% ज्यादा

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मुंबई7 मिनट पहले

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प्रतीकात्मक छवि

  • डिजिटल भुगतान में वृद्धि के साथ-साथ बैंक नोटों का भी उपयोग किया गया है

कोरोना के समय में डिजिटल ट्रांजैक्शन तो बढ़ा है, लेकिन लोग कैश पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं। लॉकडाउन के दौरान लोगों को लगा कि बैंक से कैश निकालते समय कैश अपने पास रखना चाहिए। नतीजा यह रहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में नोटों का प्रचलन औसत से 17 फीसदी ज्यादा रहा। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 2020-21 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष के दौरान प्रचलन में बैंकनोटों के मूल्य में 16.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसकी संख्या में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिजर्व बैंक ने कहा कि महामारी की शुरुआत के साथ अब जबकि अर्थव्यवस्था में नकदी की मांग बढ़ गई है, उन्होंने बैंक में नोटों की बढ़ती मांग को पूरा करने की कोशिश की है। देश में नए नोटों की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए, सभी मूल्यवर्ग के बैंक नोटों को करेंसी वेस्ट में रखने का निर्णय लिया गया। करेंसी इस सर्कुलेशन (CIC) में बैंकनोट और सिक्के दोनों शामिल हैं। वर्तमान में, RBI 2,5,10,20,50,100,200,500 और 2,000 रुपये के मूल्यवर्ग में नोट जारी करता है। CIC में 50 पैसे, 1,2,5,10 और 20 रुपये के सिक्के होते हैं।

देश में बैंक नोटों की मात्रा पिछले एक दशक में दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। वर्ष 2009-10 में 5654.9 करोड़ के नोट चलन में थे। वर्ष 2019-20 में इसकी संख्या बढ़कर 11597.7 करोड़ हो गई है और 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष 2020-21 में यह संख्या बढ़कर 12436.7 करोड़ हो गई है।

500 और 2000 के नोटों की हिस्सेदारी 2.3 फीसदी बढ़ी
मूल्य के लिहाज से 500 और 2,000 रुपये के नोटों की कुल कीमत में 31 मार्च, 2021 तक की हिस्सेदारी बढ़कर 85.7 प्रतिशत हो गई है। एक साल पहले 31 मार्च, 2020 तक शेयर 83.4 फीसदी था। मात्रा के लिहाज से 31 मार्च 2021 तक 500 रुपये के नोटों के चलन में सबसे ज्यादा 31.1 फीसदी की हिस्सेदारी थी। इसके बाद 10 रुपये के नोटों में 23.6 फीसदी की हिस्सेदारी रही।

नोटों की सुरक्षा छपाई पर खर्च में 9.11 प्रतिशत की गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जुलाई, 2020 से 31 मार्च, 2021 के बीच बैंक नोटों की सुरक्षा छपाई में 4012.1 करोड़ रुपये का खर्च आया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9.11 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। 1 जुलाई 2019 से जून 2020 के बीच नोटों की सुरक्षा छपाई पर 4377.8 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

जाली नोटों को 29.7 प्रतिशत जब्त किया गया
जहां तक ​​नकली नोटों की बात है तो रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2020-21 के दौरान कुल 208,625 जाली नोटों को जब्त किया गया। यह पिछले वर्ष के 2019-20 में जब्त किए गए 296695 जाली नोटों की तुलना में 29.68 प्रतिशत कम है। जिसमें से पिछले साल 2018-19 में 317384 नकली नोट जब्त किए गए हैं। बैंकिंग क्षेत्र में जब्त किए गए कुल नकली नोटों में से 3.9 प्रतिशत रिजर्व बैंक और शेष 96.1 प्रतिशत अन्य बैंकों द्वारा जब्त किए गए।

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Updated: May 28, 2021 — 12:13 am

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