Local Job Box

Best Job And News Site

भारत में पहली बार स्ट्रेन को डेल्टा कहा जाएगा, WHO ने कहा- किसी भी देश को नए स्ट्रेन की रिपोर्ट करने पर दंडित नहीं किया जाना चाहिए | देश में पहली बार मिले कोरोना स्ट्रेन को ‘डेल्टा’ कहा जाएगा, WHO ने कहा- किसी भी देश को नए स्ट्रेन की रिपोर्ट करने पर दंडित नहीं किया जाना चाहिए

  • गुजराती समाचार
  • अंतरराष्ट्रीय
  • भारत में पहली बार डेल्टा कहलाएगा स्ट्रेन, WHO ने कहा- किसी भी देश को नए स्ट्रेन की रिपोर्ट करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए

विज्ञापनों से परेशान हैं? विज्ञापनों के बिना समाचार पढ़ने के लिए दिव्य भास्कर ऐप इंस्टॉल करें

जिनेवा5 मिनट पहले

  • प्रतिरूप जोड़ना
  • कोरोना के नए स्ट्रेन पर तथाकथित भारत सरकार ने आपत्ति जताई थी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना के नए संस्करण का नाम कंसर्न (वीओसी) वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (वीओआई) रखने के लिए ग्रीक अक्षरों के इस्तेमाल की घोषणा की है। इस आधार पर भारत में मिलने वाले कोरो के पहले संस्करण को डेल्टा कहा जाएगा, जबकि पहले वाले संस्करण को कप्पा कहा जाएगा।

डब्ल्यूएचओ के कोविड-19 तकनीकी प्रमुख डॉ. मारिया वान कारखोव ने कहा कि इस स्तर से मौजूदा वैज्ञानिक नामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उनसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त होती है और अनुसंधान के लिए उपयोग की जाती रहेगी। किसी भी देश को कोरोना वेरिएंट की जानकारी खोजने या उपलब्ध कराने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार ने वायरस को भारतीय संस्करण कहने पर आपत्ति जताई थी
कोरोना के नए स्ट्रेन पर तथाकथित भारत सरकार ने आपत्ति जताई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का यह बयान कि बी.1.617 संस्करण दुनिया के लिए चिंता का विषय है, कई मीडिया रिपोर्टों में शामिल किया गया है। उनकी कुछ रिपोर्टों में इस संस्करण को भारतीय कहा गया था, लेकिन ये रिपोर्ट निराधार हैं। सरकार का दावा है कि उसके 52 पन्नों के दस्तावेज़ में कहीं भी भारतीय बी.1.617 संस्करण से जुड़ा हुआ नहीं है।

सरकार के इस दावे की पुष्टि WHO ने भी की थी
डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया कार्यालय ने कहा कि वायरस या संस्करण देश के नाम से जुड़ा नहीं था। लेकिन केवल इसके वैज्ञानिक नाम से जाना जाता है और सभी को ऐसा करना चाहिए। इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने भारत में कोरोना की दूसरी लहर में भारत में फैले बी-1617 स्ट्रेन को वैश्विक चिंता का विषय घोषित किया था। कहने का तात्पर्य यह है कि यह संस्करण अधिक संक्रामक दिखता है और अधिक आसानी से फैल सकता है।

डब्ल्यूएचओ के अध्यक्ष मारिया वान केरखोव के अनुसार, एक छोटे नमूने के आकार पर एक प्रयोगशाला अध्ययन में पाया गया कि एंटीबॉडी से संस्करण कम प्रभावित था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस वैरिएंट में वैक्सीन से ज्यादा इम्युनिटी है।

ये है महाराष्ट्र, दिल्ली में संक्रमण बढ़ने का कारण
B.1.617 वैरिएंट, जिसे डबल म्यूटेंट भी कहा जाता है, महाराष्ट्र और दिल्ली में अधिक आम है। यही कारण है कि यहां महामारी की दूसरी लहर का ज्यादा असर पड़ा है। देश के सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक, महाराष्ट्र के कई प्रमुख शहरों में जीनोम अनुक्रमण के अधीन आधे से अधिक नमूनों में B.1.617 प्रकार पाए गए हैं।

एक और खबर भी है…
Updated: June 1, 2021 — 6:11 am

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Local Job Box © 2021 Frontier Theme